अब और कितने बलिदान लेगी लापरवाही ।

सच तो यही है की ना तो हम घटनाओं से सबक लेते है और न ही घटनाओं के बाद गलतियों को सुधारनें की कोशिस ही करते है । ये इसी का परिणाम है कि हमें अपनों को खोना पड़ता है , भोपाल की जेल से भागे सिमी आतंकवादियों के घटनाक्रम में भी ऐसा ही कुछ हुवा, इतने खतरनाक आतंकवादियों की निगरानी के लिए केवल दो कॉन्स्टेबल वो भी बिना किसी हथियार के और ऊपर से जेल के सीसीटीवी कैमरे भी ख़राब पड़े हो । लगता है मानो इन आतंकवादियों के मजे ही आ गए हो फिर क्या था इसी लापरवाही का फायदा उठाया इन आतंकवादियों ने और लापरवाही का खामियाजा भुगतान पड़ा ड्यूटी पर तैनात कॉन्स्टेबल को ।  

इन दो कोंस्टेबल में से एक को तो उन्होंने बांध दिया लेकिन शायद दूसरे पर उनका बस नही चला या शायद दूसरे कोंस्टेबक्ल की बहादुरी उन्हें जेल से भागने नही दे रही थी फिर क्या था आतंकवादियों ने उस निहत्ते कॉन्स्टेबल को मार दिया और जेल से फरार हो गए । हालाँकि कुछ ही घंटों बाद उनका इनकाउंटर कर दिया गया फिर भी इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया और साथ ही कई सवाल भी खड़े कर दिए । जेल प्रशासन की इस एक लापरवाही ने किसी के बच्चों से पिता का साया छीन लिया तो वहीँ एक घर का सदस्य भी उन से छीन लिया । उन्होंने तो अपने फर्ज के लिए कुर्बानी दे दी परन्तु अपने पीछे कई सवाल छोड़ कर चले गए , अकेला छोड़ गए तो उस बेटी को जिसकी एक महीने बाद हाथों में मेहँदी लगने वाली थी ।
अब समझने वाली बात तो यह है कि जिस जेल में इतने खतरनाक आतंकवादी है वहां इनकी निगरानी के लिए केवल दो कॉस्टेबल वो भी बिना हथियार के और जेल का सीसीटीवी कैमरा भी कई हफ़्तों से खराब । और तो और जब इतनी बड़ी घटना हुई तो जेल परिशर के बाकी लोग कहाँ थे क्या जेल परिसर में दो ही पुलिस वाले थे , शहीद की बेटी ने तो इतना भी बताया कि  उनके पापा हार्ट के मरीज थे और उन्होंने कई बार अपने ड्यूटी बदले ने को भी कही पर किसी ने इस पर कोई कदम नही उठाया । यदि जेल प्रशाशन सजग रहता और ऐसी लापरवाही न करता तो शायद आज उस बेटी के पिता जिन्दा होते जिसका आज रो रो कर बुरा हाल है , हालांकि सरकार मदद का आस्वासन तो दे रही है परंतु क्या इन सबसे जेल प्रशासन से हुए इतनी बड़ी चूक को दबा दिया जाएगा या फिर जो हमारे बीच नही है वो वापस आ जाएंगे ।
यदि कुछ करना ही है तो हमें गलतियों से सबक लेना चाहिए उन्हें सुधारना चाहिए ताकि भविष्य में किसी और को लापरवाही का खामियाजा न भुगतना पड़े ।

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